Showing posts with label bihar chief minister nitish kumar. Show all posts
Showing posts with label bihar chief minister nitish kumar. Show all posts

Thursday, April 22, 2010

मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना

पिछले चार वर्षों में हमारी सरकार द्वारा किए गए कई कल्याणकारी प्रयासों मे, 'मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना' मेरे दिल के बहुत करीब है। इस योजना ने बिहार की तस्वीर बदल दी है और लाखो स्कूल जाने वाली लड़कियां साइकिल चलकर कुछ हासिल करने के मकसद से स्कूल जा रही हैं । इस योजना के शुरू करने से पहले तीन साल पहले तक स्कूल जाने वाली बालिकाओं को साइकिल चलते हुए देखना पुरे बिहार ही नहीं बल्कि पटना की सरको पर भी दुर्लभ था। लेकिन अब, आप आत्मविश्वास से भरी हुई लड़कियों को साइकिल चलाते हुए राज्य मे हर जगह देख सकते हैं - गाँव की संकिरी पगडंडियों से शहर के चहल पहल वाली सडकों तक।


इस योजना के अंतर्गत आठवीं कक्षा पास करने के बाद हर स्कूल जाने वाली बच्ची को दो हज़ार (२०००) रुपये का चेक साइकिल खरीदने के लिए दिया जाता है ताकी वोह आसानी से स्कूल हर दिन जा सकें। यह कहना ग़लत नहीं होगा की इस योजना ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। इस योजना मे मुझे काफी संतुसटी दिलाई है, क्यूंकि इस ने लड़कियों मे पढाई छोड़ने की दर को पुरे राज्य मे काफी घटाया है।



पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़ों पर एक नजर डालें करने के लिए इस योजना की सफलता का
अंदाज़ा लगाया जा सकता है। वर्ष 20०७-०८ मे हमारी सर्कार ने ३२.६० करोड़ रुपये १.६३ लाक स्कूल जाने वाली लड़कियों के साइकिल खरीदने मे खर्च किये, वर्ष २००८-०९ मे हम ने ५४.४३ करोड़ रुपये २.७२ लाख साइकिल खरीदने के लिए खर्च किये और वर्ष २००९-१० मे ४.३६ लाख बालिकाओं ने ८७.३३ करोड़ के बुद्गेत से साइकिल खरीदी। पिछले तीन वर्षों मे हमारी सरकर ने १७४.३६ करोड़ रुपये खर्च किये हैं, जिससे ८.७१ लाख स्कूल जाने वाली लड़कियों को साइकिल मिले हैं जो की वह लोग शिक्षा प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। ये महज आंकड़े नहीं हैं। बल्कि एक तथ्य एक अभिपुष्टि है, वास्तव मे एक छोटी सी पहल वास्तव में एक बड़ा परिवर्तन लेन मे सक्षम है।


बिहार में साइकिल अब सामाजिक परिवर्तन का एक सत्य साधन बन गया है जो राज्य के किसी भी हिस्से में महसूस किया जा सकता है। मैंने हमेशा माना है कि किसी भी समाज मे तबतक परगति नहीं हो सकती जबतक महिलाएं परगति नहीं करती - और किसी समाज मे महिलाएं तबतक परगति नहीं कर सकती हैं जबतक वोह शिक्षित न हों।

यह योजना सही दिशा में एक छोटा सा कदम है। इस परियोजना की वजह से आज राज्य भर मे परिवर्तन की हवाएं बह रही हैं। और इसके दीर्घकालिक प्रभाव आने वाले कुछ साल में महसूस किया जाएगा. लकिन मुझे यह कहने मे संकोच नहीं है की इस योजना ने बिहार को एक जीवंत राज्य की तरह आगे बढ़ने मदद की है जो की अपनी महिलाओं को सशक्त बनाने में विश्वास रखता है। लड़कियों को शिक्षित करना उनमें से एक है.